Wednesday, October 29, 2014

YAMUNA RIVER IN INDIA COULD BE PURIFIED IN 3 YEARS-JAPAN

तीन साल में शुद्ध हो सकती है यमुनाः जापान

दिल्ली में गंदे नाले में तब्दील हो चुकी यमुना अगले तीन साल में निर्मल हो जाएगी। जापान ने अगले तीन सालों के भीतर यमुना को शुद्ध कर देने का दावा किया है। उसका कहना है कि यमुना का पानी लोगों के लिए तैरने लायक ही नहीं बल्कि पीने लायक भी हो जाएगा।जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जीका) के मुखिया सिन्या एजिमा ने कहा कि यमुना में गिरने वाले नालों और सीवर को रोकने की दिशा में संतोषजनक प्रगति हुई है।जीका और शहरी विकास मंत्रालय के साथ हुई बैठक में यमुना के स्वच्छ होने को लेकर जापान के प्रतिनिधियों ने काफी उम्मीद जताई। प्रतिनिधियों ने कहा कि यमुना की सफाई के लेकर चल रही परियोजनाओं का प्रदर्शन संतोषजनक है।उनका मानना है कि यदि तत्काल उन्हें आगे काम शुरू करने का मौका मिल जाए तो तीन साल में दिल्ली के अंदर यमुना का पानी पीने लायक शुद्ध किया जा सकता है। ध्यान रहे कि जीका शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति व सीवर प्रणाली से जुड़ी परियोजनाओं पर न सिर्फ काम करती है, बल्कि वित्तीय मदद भी देती है।फिलहाल देश के विभिन्न राज्यों में 16 बड़ी परियोजनाओं से जीका जुड़ा है। दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक व गोवा की प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए जापान से 28660 करोड़ रुपये का ऋण प्रस्तावित है।जीका प्रमुख एजिमा ने बताया कि इस मदद के अलावा शहरी क्षेत्र में जल और परिवहन के लिए उनका संगठन 2.40 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मुहैया कराने को तैयार है।उन्होंने कहा कि भारत के शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति और जल शोधन एक बड़ी चुनौती है। ऑपरेशन एंड मेंटीनेंस के साथ स्थायी कार्य के लिए स्थानीय निकायों को और प्रभावी होना होगा।पानी की किल्लत को कम करने के लिए रिसाइक्लिंग बहुत जरूरी है। इसी तरह शहरों के भीतर परिवहन बड़ी चुनौती है। इसके लिए मेट्रो रेल प्रणाली, क्षेत्रीय ट्रांजिट सिस्टम, मोनो रेल और लाइट रेल जैसे ट्रांसपोर्ट के साधन जुटाने होंगे।शहरी विकास सचिव शंकर अग्रवाल और जापान के संयुक्त कार्य समूह के संयुक्त कार्य समूह के महानिदेशक योइची नाकागामी की यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान हुए समझौते पर अमल के सिलसिले में हुई थी।यह पहली बार है जब दो देशों के बीच संयुक्त बैठक में राज्यों को भी शामिल किया गया। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा व केरल प्रमुख थे। इस दौरान महाराष्ट्र सरकार ने विस्तृत परियोजनाओं का जिक्र किया।
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