Thursday, July 9, 2015

देश फिर बनेगा सोने की चिडि़या

झारखंड (8 जुलाई 2015):झारखंड की राजधानी के नज़दीक तमाड़ में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को ऐसी खदाने मिली हैं जहां से निकल रहा है सोना। जीएसआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती फाड़कर निकल रहे इस सोने का अंबार करीब एक लाख टन का है।
ज़मीन फाड़कर निकल रहे सोने के इस अंबार ने 19वीं सदी के कैलिफोर्निया की घटना को याद दिला दिया है जिसने पूरी दुनिया के कारोबारियों और व्यापारियों को वहां का रुख करने के लिए मजबूर कर दिया था। साल 1848 में यहां खुदाई के दौरान बड़े पैमाने पर सोना मिला था। ये घटना इतिहास के पन्नों में 'कैलिफोर्नियन गोल्ड रश' के नाम से दर्ज है। अब एक बार फिर इतिहास खुद को झारखंड के परासी में दोहरा रहा है। हालांकि यहां मिलने वाले सोने की क्वानटिटी और क्वालिटी का अब तक अनुमान नहीं लगाया जा सका है लेकिन जियोलॉजिस्ट का मानना है कि अब तक टेस्ट के जो नतीजे सामने आए हैं, उसके मुताबिक यहां मिलने वाला सोना बेहतरीन क्वालिटी का का है


खबरों के मुताबिक जियोलॉजिकल सर्वे तमाड़ के दूसरे इलाकों में भी सोने की तलाश का काम तेज कर दिया है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस इलाके में 300 मिलियन टन कच्चा सोना है। जानकारों के मुताबिक औसतन एक टन कच्चे सोने में 3.50 ग्राम सोना निकलता है। इस हिसाब से झारखंड के अंदर मिल रहे सोने की कीमत 25 हज़ार करोड़ बताई जा रही है। सूबे में सोना खोज रहे जीएसआई से झारखंड सरकार के भूतत्व निदेशालय ने 2014 में रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट में तमाड़ के अंदर सोने का अकूत खज़ाना होने का खुलासा हुआ है।
जीएसआई के मुताबिक मानसून के बाद अगस्त से अक्टूबर के बीच परासी ब्लॉक तैयार करके ड्रिलिंग का काम किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इस काम में करीब एक साल का वक़्त लगेगा। इसके बाद इलाके की नीलामी की घोषणा की जाएगी। परासी में जिस अकूत सोने का पता चला है वो तमाम राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर रहा है, लिहाज़ इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक तमाड़ के सिंदुरी, लुंगटु, हेपसेल और परासी में ज़मीन के नीचे सोने का अकूत भंडार होने का दावा किया गया है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट सरकार को अब तक नहीं मिली है। इस रिपोर्ट के मिलते ही वहां खुदाई का काम शुरू कर दिया जाएगा जिसमें लुंगटू-हेपसेल-परासी ब्लॉक बनाया जाएगा।
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के उप-महानिदेशक के मुताबिक, इस इलाके में पिछले 15 सालों से काम कर रहा है और परसा गांव के पास मिले सोने की रिपोर्ट भी वो सरकार को भेज चुके हैं। ऐसा नहीं है कि यहां पहली बार धरती फाड़कर सोना निकल रहा हो। इस इलाके में पहली बार 2006 में ड्रिलिंग की गई थी, तब भी तमाड़ में ज़मीन के नीचे सोने का खज़ाना होने की बात कही गई थी। पहले राउंड में यहां 12 जगहों पर ड्रिलिंग की गई थी।



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