Monday, May 23, 2016

बाड़मेर की पहाड़ियों में मिला 1000 अरब का 'खजाना', खबर सुनकर चीन की उड़ गई नींद


अपने दामन में तेल और कोयला समेटे राजस्थान की बाड़मेर पहाड़ियां अब दुर्भल खनिज भी उगलेंगी। यहां की चट्टानों में एक हजार अरब से ज्यादा का दुर्लभ खनिज होने के संकेत मिले हैं। करीब सात मिलियन टन और साढ़े सात सौ वर्ष पुराना यह खजाना भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने खोज निकाला है। देश में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में टेरिस्टीअल यानी जमीन पर पाए जाने वाले खनिज का भंडार मिला है। इस खबर को सुनकर चीन परेशान हो गया है। क्योंकि रेअर अर्थ के निर्यात मामले में चीन की दुनिया में बादशाहत चल रही है। ऐसे में अब उसका ताज छिनने का संकट पैदा होने से चिंतित होना लाजिमी है। बाड़मेर जिला  तेल और कोयला जैसी खनिज संपदाओं के दम पर देश की खनिज राजधानी के रूप में मशहूर हो रहा है। 

चीन के पास 97 फीसदी खनिज

चीन दुनिया में 97 फीसदी रेअर अर्थ का निर्यात करता है। वहीं अमेरिका, मलेशिया, आस्ट्रेलिया, ब्राजील और भारत में महज तीन प्रतिशत यह खनिज संपदा पाई जाती है। दुनिया में इस खनिज की मांग बढ़ने पर 2010 से चीन ने निर्यात करना कम कर दिया। जिससे दुनिया के देशों को उससे बार-बार मान-मनुहार करनी पड़ती है। कम सप्लाई से उपलब्धता का संट पैदा कर चीन खूब मुनाफा भी कर रहा है। ऐसे में भारत में खनिज की खोज से चीन की बादशाहत छिन जाएगी। 

खनिज का इस्तेमाल

रेअर अर्थ का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण कार्यों में होता है।  मसलन, बैटरी, केमिकल इंडस्ट्री वर्क, सुपर कंडक्टर, हाई प्लग्स, मैग्नेट, इलेक्ट्रानिक पॉलिसिंग, स्पेश सेक्टर, सौर ऊर्जा, सैन्य उपकरण, आयल रिफाइनरी, हाईब्रिड कार आदि से जुड़े कार्यों में इसका इस्तेमाल होता है। 

बाड़मेर.

खजाना यहां होने के प्रमाण

बाड़मेर के सिवाना रिंग्स कांम्प्लेक्स और मालानी रॉक्स में यह खजाना खोज में मिला है। सिवाना क्षेत्र के कमठाई, लंगेरा, राखी, फूलन व डंडाली में यह खजाना है। यहां की चट्टानें करीब 745 मिलियन वर्पुष रानी हैं। 

इस प्रकार के खनिज मिले

बाड़मेर में थोरियम, यूरेनियम, जर्मेनियम, टिलूरियम, यूरेनियम, रुबीडियम, गैलेनिय जैसे 15 प्रकार के खनिज रेअर अर्थ के तहत मिले हैं। सभी लेंथोनाइट ग्रुप के खनिज हैं। 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

वरिष्ठ भू-विज्ञानी प्रो. एससी माथुर कहते हैं कि खनिज की मौजूदगी से पता चलता है कि राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में उच्च ताप-दाब की घटना पूर्व में घट चुकी है।  20 किमी त्रिज्या के उल्कापिंड टकराने से दो सौ किमी त्रिज्या की सिवाना संरचना बना। डाइट्स में दुर्भल खनिज मिलते हैं। बाड़मेर में  65 मिलियन वर्ष की रेडियल डाइट्स के संकेत मिले हैं।

From 

http://www.indiasamvad.co.in/