Tuesday, November 17, 2015

टीपू सुल्तान हीरो से 'औरंगजेब

टीपू सुल्तान एंटी हिंदू था या नहीं, इस पर बहस होती रहेगी. लेकिन आईए, आपको बताते हैं इतिहास में दर्ज टीपू सुल्तान से जुड़ी वे बातें जो उसे हीरो से 'औरंगजेब' बना देती हैं...
1. 19वीं सदी में ब्रिटिश गवर्मेंट के अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब 'मालाबार मैनुअल' में लिखा है कि कैसे टीपू सुल्तान ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू सुल्तान हाथी पर सवार था और उसके पीछे उसकी विशाल सेना चल रही थी. पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी गई. उनके बच्चों को उन्हीं के गले में बांध पर लटकाया गया.
2. इसी किताब में विलियम यह भी लिखते हैं कि शहर के मंदिर और चर्चों को तोड़ने के आदेश दिए गए. यहीं नहीं, हिंदू और इसाई महिलाओं की शादी जबरन मुस्लिम युवकों से कराई गई. पुरुषों से मुस्लिम धर्म अपनाने को कहा गया और जिसने भी इससे इंकार किया उसे मार डालने का आदेश दिया गया.
3. कई जगहों पर उस पत्र का भी जिक्र मिलता है, जिसे टीपू सुल्तान ने सईद अब्दुल दुलाई और अपने एक अधिकारी जमान खान के नाम लिखा है. पत्र के अनुसार टीपू सुल्तान लिखता है, 'पैगंबर मोहम्मद और अल्लाह के करम से कालीकट के सभी हिंदूओं को मुसलमान बना दिया है. केवल कोचिन स्टेट के सीमवर्ती इलाकों के कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन अभी नहीं कराया जा सका है. मैं जल्द ही इसमें भी कामयाबी हासिल कर लूंगा.'
4. यहां 1964 में प्रकाशित किताब 'लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान' का जिक्र भी जरूरी है. इसमें लिखा गया है कि उसने तब मालाबार क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा हिंदुओं और 70,000 से ज्यादा ईसाइयों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया.
5. इस किताब के अनुसार धर्म परिवर्तन टीपू सुल्तान का असल मकसद था, इसलिए उसने इसे बढ़ावा दिया. जिन लोगों ने इस्लाम स्वीकार किया, उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों की शिक्षा भी इस्लाम के अनुसार देनी पड़ी. इनमें से कई लोगों को बाद में टीपू सुल्तान की सेना में शामिल किया गया और अच्छे ओहदे दिए गए.
6. टीपू सुल्तान के ऐसे पत्रों का भी जिक्र मिलता है, जिसमें उसने फ्रेंच शासकों के साथ मिलकर अंग्रेजों को भगाने और फिर उनके साथ भारत के बंटवारे की बात की. ऐसा भी जिक्र मिलता है कि उसने तब अफगान शासक जमान शाह को भारत पर चढ़ाई करने का निमंत्रण दिया, ताकि यहां इस्लाम को और बढ़ावा मिल सके.
कर्नाटक सरकार द्वारा धर्मान्ध शासक टीपू सुल्तान की जयंती सरकारी खर्च पर मनाई जा रही है।
इस निर्णय का विश्व हिन्दू परिषद और बीजेपी द्वारा जमकर विरोध किया जा रहा है जो उचित है।
टीपू हिन्दुओ का बलात् धर्मान्तरण कराने और नरसंहार करने में ओरंगजेब से किसी भी तरह कम नही था फिर भी वामपंथी इतिहासकारो ने नेहरूवादी कांग्रेस की शह पर उसका महिमामण्डन कर इतिहास को विकृत करने का काम किया है।
बीजेपी नेता और संघ परिवार विरोध करने से पहले अपने गिरेबान में झाँककर देख लें कि विकृत इतिहास के शुद्धिकरण का कार्य केंद्र सरकार के अधीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय का है जिसमे अटल सरकार में मुरली मनोहर जोशी ने शानदार कार्य किया था और विकृत इतिहास को शुद्ध करवाने का ईमानदारी से प्रयास किया था।जिसे पिछले दस साल में फिर से बिगाड़ दिया गया।
अब मोदी जी ने यह दायित्व अपनी पसन्द से जिस स्मृति ईरानी को दिया है वो स्नातक भी नही है।पिछले डेढ़ साल में स्मृति ईरानी के मंत्रालय ने वामपंथी इतिहास को शुद्ध करने की दिशा में क्या कार्य किया है संघ परिवार के सदस्य इसका आकलन करें।
क्या इसके लिए भी राज्य सभा में बहुमत न होने का बहाना है???
अगर बच्चे इतिहास की किताबो में टीपू सुल्तान को महान पढ़ेंगे तो वो उसे महान ही समझेंगे चाहे कितना ही विरोध प्रदर्शन कर लो कोई लाभ नही।
एक तरफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन पाठ्यक्रम में टीपू को महान बताना और वहीँ संघ परिवार द्वारा टीपू की जयंती मनाए जाने का विरोध दोहरा मापदण्ड नही तो और क्या है??????