Tuesday, October 20, 2015

राजा भोज परमार, Raja bhoj

राजा भोज परमार जिनसे बडा राजपूत क्षत्रिय राजा पिछले एक हजार वर्षो में नहीं हुआ । राजा भोज का जन्म मध्य प्रदेश के मालवा राज्य की एतिहासिक नगरी उज्जैन में हुआ । उनके पिता का नाम सिंधुराज था । राजा भोज बचपन से ही विद्वान थे उन्होंने महज 8 वर्ष की उम्र में संपूर्ण वेद पुराण का ज्ञान प्राप्त कर लिया था । राजा भोज जब 15 वर्ष के थे तब उन्हें मालवा का राजा बनाया गया राजा भोज जब सिंहासन पर बैठे तब उन्होंने पुरे देश का मानचित्र देखा और यह भी देखा की देश 57 भागों में बंटा हुआ था उस समय राजा भोज ने अंखड भारत को एक करने का बिडा उठाया राजा भोज ने भारतवर्ष के सभी राजाओं को संदेश भेजा की सभी देशवासियों को एक हो कर देश को बचाना ही होग
तब कई राजाओं ने राजा भोज का विरोध किया तब राजा भोज ने देश धर्म की रक्षा के लिए तलवार उठाई और तब जन्म हुआ इतिहास के सबसे बडे योद्धा राजा भोज ।
राजा भोज ने अपने जीवन में हिंदुत्व की रक्षा के लिए 5 हजार से भी ज्यादा युध्द लडे आज तक किसी ने इतने युद्ध नहीं लडे ।
भोज ने सन् 1000 ई. से 1055 ई. तक राज्य किया। इनकी विद्वता के कारण जनमानस में एक कहावत प्रचलित हुई कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तैली.....
भोज बहुत बड़े वीर, प्रतापी, पंडित और गुणग्राही थे। इन्होंने अनेक देशों पर विजय प्राप्त की थी और कई विषयों के अनेक ग्रंथों का निर्माण किया था। ये बहुत अच्छे कवि, दार्शनिक और ज्योतिषी थे। सरस्वतीकंठाभरण, शृंगारमंजरी, चंपूरामायण, चारुचर्या, तत्वप्रकाश, व्यवहारसमुच्चय आदि अनेक ग्रंथ इनके लिखे हुए बतलाए जाते हैं। इनकी सभा सदा बड़े बड़े पंडितों से सुशोभित रहती थी। इनकी पत्नी का नाम लीलावती था जो बहुत बड़ी विदुषी थी।
जब भोज जीवित थे तो कहा जाता था-
अद्य धारा सदाधारा सदालम्बा सरस्वती।
पण्डिता मण्डिताः सर्वे भोजराजे भुवि स्थिते॥
(आज जब भोजराज धरती पर स्थित हैं तो धारा नगरी सदाधारा (अच्छे आधार वाली) है; सरस्वती को सदा आलम्ब मिला हुआ है; सभी पंडित आदृत हैं।)
जब उनका देहान्त हुआ तो कहा गया -
अद्य धारा निराधारा निरालंबा सरस्वती।
पण्डिताः खण्डिताः: सर्वे भोजराजे दिवं गते ॥
(आज भोजराज के दिवंगत हो जाने से धारा नगरी निराधार हो गयी है ; सरस्वती बिना आलम्ब की हो गयी हैं और सभी पंडित खंडित हैं।)
नोट: राजा भोज ने कभी किसी बेकसूर को नही मारा वे हर युद्ध से पहले उस राज्य के राजा को संदेश भेजते थे की मे देश को एक करना चाहता हूँ जो विरोध करता उस से ही युद्ध लडते थे ।
राजा भोज के कुछ प्रसिद्ध युद्ध ।
1 भोज चरित्र के अनुसार राजा भोज ने चालूक्य राज्य के कल्याणी राजा को युद्ध में मारा क्योंकि वो देश को एक करने के राजा भोज के अभियान का विरोधी था ।
2 धुआरा प्रंसति के अनुसार राजा भोज ने कलचूरी राजा गंगयादेव को हराया
3 उदयपुर प्रसति के अनुसार महाराजा भोज ने उडीसा के राजा इंद्र दत्त को हराया जो कि उडीसा के सबसे ताकतवर राजा थे उन्हें भी महाराजा भोज ने हराया ।
4 धुआरा प्रसति के अनुसार राजा भोज ने लता नगर के कीर्ती राजा को हराया था
5 राजा भोज ने महाराष्ट्र के कोकंण मुंबई सहित अनेक राजाओं को हराया ।
6 कन्नौज शहर से प्राप्त हुए दस्तावेजों के अनुसार राजा भोज ने संपूर्ण उत्तर भारत बिहार सभी राज्य को हराया था
7 ग्वालियर में स्थित सांस बहू लिपि के अनुसार ग्वालियर के राजा कीर्तीराज को हराया था ।
8 राजा भोज से राजपूताना के चौहान राजा ने भी युद्ध लडा पर वो राजा भोज से हारे गये इसी तरह राजा भोज ने पुरे राजपूताने पर राज्य किया ।
9 राजा भोज ने चित्रकूट के किले को जीता और चित्रकूट की रक्षा की ।
10 राजा भोज ने मोहम्मद गजनवी की सेना से युद्ध लडा और भारत के कई राजाओं की सहायता की गजनवी से लडते हुए ।
राजा भोज ने थांनेश्वर , हांसी नगर , कोटा को मुस्लिम राजाओं की गुलामी से छुडाया और हिन्दू शासन की स्थापना की ।
11--राजा भोज ने सय्यद सलार मसूद गाजी के विरुद्ध हांसी दिल्ली के तोमर राजपूतों और अयौध्या के बैस गहरवार राजपूतों सुहेलदेव बैस की मदद की जिससे उस आक्रमणकारी को उसकी सेना सहित नष्ट कर दिया गया.....
12---सन् 1008 ई. में जब महमूद गज़नबी ने पंजाब में जंजुआ राजपूत शाही जयपाल के राज्य पर आक्रमण किया, भोज ने भारत के अन्य राज्यों के साथ अपनी सेना भी आक्रमणकारी का विरोध करने तथा शाही आनंदपाल की सहायता करने के हेतु भेजी। सन् 1043 ई. में भोज ने अपने भृतिभोगी सिपाहियों को पंजाब के मुसलमानों के विरुद्ध लड़ने के लिए दिल्ली के राजा के पास भेजा। उस समय पंजाब गज़नी साम्राज्य का ही एक भाग था और महमूद के वंशज ही वहाँ राज्य कर रहे थे। दिल्ली के तोमर राजा को भारत के अन्य भागों की सहायता मिली और उसने पंजाब की ओर कूच करके मुसलमानों को हराया और कुछ दिनों तक उस देश के कुछ भाग पर अधिकार रखा...........
कहते हैं कि विश्ववंदनीय महाराजा भोज माँ सरस्वती के वरदपुत्र थे! उनकी तपोभूमि धारा नगरी में उनकी तपस्या और साधना से प्रसन्न हो कर माँ सरस्वती ने स्वयं प्रकट हो कर दर्शन दिए। माँ से साक्षात्कार के पश्चात उसी दिव्य स्वरूप को माँ वाग्देवी की प्रतिमा के रूप में अवतरित कर भोजशाला में स्थापित करवाया।राजा भोज ने धार, माण्डव तथा उज्जैन में सरस्वतीकण्ठभरण नामक भवन बनवाये थे। भोज के समय ही मनोहर वाग्देवी की प्रतिमा संवत् १०९१ (ई. सन् १०३४) में बनवाई गई थी। गुलामी के दिनों में इस मूर्ति को अंग्रेज शासक लंदन ले गए। यह आज भी वहां के संग्रहालय में बंदी है।
राजा भोज के राज्य मालवा में उनके होते हुए कोई भी विदेशी कदम नही रख पाया वहीं राजा भोज ने सम्राट बन ने के बाद पुरे देश को सुरक्षित कर महान राज्य की स्थापना की राजा भोज का साम्राज्य अरब से लेकर म्यांमार जम्मू कश्मीर से लेकर श्रीलंका तक था राजा भोज बहुत महान राजा थे ।
राजा भोज द्वारा बसाए गये एतिहासिक शहर - भोपाल जो पहले भोजपाल था , धार , भोजपुर सहित 84 नगरों की स्थापना राजा भोज ने की ।
राजा भोज द्वारा निर्मित देश का सबसे बडा तालाब भोजताल जो मध्य प्रदेश के भोपाल ( भोजपाल ) में स्थित है इस तालाब के पानी से ही भोपाल अपनी प्यास बुझाता है ।
राजा भोज द्वारा निर्मित मंदिर - विश्व का सर्वश्रेष्ठ मंदिर माँ सरस्वती मंदिर भोजशाला जहाँ की सरस्वती माँ की प्रतिमा लंदन म्यूजियम में कैद है , वही सोमनाथ मंदिर , उज्जैन महाकाल मंदिर , विश्व का सबसे बडा ज्योतिरलिंग भोजेशवर मंदिर मध्य प्रदेश के भोजपुर में स्थित 18 फीट का भव्य लिंग , केदारनाथ मंदिर सहित 10 लाख से ज्यादा मंदिरों का निर्माण मालवा नरेश भारत सम्राट महाराजा भोज ने करवाये ।
ऐसे महान महाराजा भोज को हमारा प्रणाम ।
आइये राजा भोज को सम्मान दिलाए कुछ ऐसे कार्य करे हम उनके लिए ।
1 राजपूत बहुल क्षेत्रों में महाराजा भोज की आदमकद प्रतिमाएँ स्थापित की जाए वह हर बंसत पंचमी पर राजा भोज की जयंती पुरे धूम धाम से शहर गांव नगर में मनाई जाए ।
2 भोपाल वह मध्य प्रदेश के सभी राजपूत भोपाल को भोजपाल करने के लिए आंदोलन करे नेताओं को जुकाए अपने वोट की ताकत दिखाकर भोजपाल करे भोपाल को ।
3 मध्यप्रदेश के धार में माँ सरस्वती की प्रतिमा जो लंदन म्यूजियम में कैद है वह वापस धार में लाकर स्थापित करने के लिए संघर्ष करे ।
4 राजा भोज का भारत की राजधानी दिल्ली सहित हर राज्य की राजधानी में महाराजा भोज का राष्ट्रीय स्मारक बनाए जाए ।
जय महाराजा भोज जय हिंद जय मालवा ।
लेखक - श्री नीरज राजपुरोहित जी और टीम राजपुताना सोच