Thursday, December 4, 2014

RAJPUT SAVED HINDUISM AND ISLAMIST CONVERSION OF INDIA

Photo: जय माता जी की हुकुम_/\_
मित्रों क्षत्रिय समुदाय सदैव राष्ट्र धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देता आया है।
राजा के रूप में पालनहार,यौद्धा के रूप में धर्म और मात्रभूमि के रक्षक की भूमिका सदियों से निभाता आया है।
जिस इस्लाम की जोशीली धारा ने ईरान,मिस्र,मध्य एशिया,और यूरोप तक महज कुछ ही दशको में अपना झंडा फहरा दिया,उसे भारत के वीर क्षत्रियो ने आर्याव्रत में विफल कर दिया।
ये राजपूतो के सफल प्रतिरोध का ही परिणाम है कि भारत में वैदिक सनातन धर्म आज भी बहुसंख्यक है।
पर इतने बलिदानों के बाद भी राजपूतो के बारे में बहुत से लोगो को गलत धारणाएँ है।हमे हर स्तर पर दबाने और कमजोर करने की कोशिशे होती हैं। पहले जमीदारी उन्मूलन,फिर भूमि हदबंदी कानून,फिर आरक्षण से हमे लगातार आर्थिक,सामाजिक,राजनितिक रूप में नीचे धकेला गया। हमने सह लिया।
पर अब हमसे हमारा इतिहास भी छीना जा रहा है!!!!!!
गत एक सदी से जिस तरह से हमारे इतिहास के साथ छेड़छाड़ हो रही है वो सभी राजपूतों से अनभिज्ञ नही है और जिस तरह से कुछ इतिहासकारो ने और अंग्रेजो ने भी हमारे इतिहास को बहुत तोड मरोड कर पेश किया है इन इतिहासकारो ने सिर्फ वो ही इतिहास हमे बताया जिसमे राजपूत कमजोर रहे पर हमारे इस पेज को बनाने का मुख्य उद्देश्य अपने शुद्ध इतिहास को लोगो तक पहुंचाना है और अपने वीर योद्धाओ की वीर गाथाओ को लोगो के समक्ष रखना है जिसको पढने मात्र से ही शरीर मे जोश और अपने राजपूत होने पर गर्व होता है और हम ये सारा इतिहास पुख्ता सबूत और प्रमाणो के साथ ही पेश करेगें क्योकी बहुत से हमारे राजपूत भाई टीवी सीरीयल देखकर या फिर अफवाहो को सुनकर उसी को सच मानकर अपना इतिहास सोच बैठते है जो कि बहुत गलत है 
विडम्बना देखिये कि जिन शक हूणो से हमारे पुरखो ने लड़ाई लडी और उन्हें मार भगाया।कुछ इतिहासकारों ने बिना किसी तथ्य के हमे उन्ही मलेच्छो का वंशज बता दिया।
इन तथाकथित इतिहासकारों ने लिखा है कि राजपूतो का इतिहास सातवी सदी से प्रारम्भ होता है जबकि उससे पहले महात्मा बुध, चन्द्रगुप्त मौर्य ,सिकन्दर को हराने वाले वीर पुरु,यौधेय वंश ,विक्रमादित्य ये सभी क्षत्रिय राजपुत्र थे और इनके वंशज आज भी क्षत्रिय राजपूत समाज का हिस्सा हैं।
हम ये सप्रमाण सिद्ध करेंगे ।
बहुत से वंश पहले शक्तिशाली थे पर बाद में कमजोर होकर कुछ अवनत हो गये कुछ दूर दराज के इलाको में चले गये कुछ दूसरी जातियों में मिल गये और कई इस्लाम धर्म में पूरी तरह धर्मान्तरित हो गये। कई वंश सिकुड़ते हुए आज एक दो ग
गाँव या परिवारों तक सीमित हो गये हैं।आज ज्यादातर राजपूत ही अपने इन प्राचीन गौरवशाली वंशो जैसे मोरी वंश,गौतम वंश,पुरु वंश,यौधेय(जोहिया)वंश के बारे में नही जानते।
इस पेज के माध्यम से हम उन सभी लुप्तप्राय वंशो का प्रमाणिक इतिहास भी सामने लाने का प्रयास करेंगे।
आज राजपूत समाज को खुद ही अपने वंशो की उत्पत्ति की सही जानकारी नही है। सुनी सुनाई बातो,अग्नि कुंड से उत्पत्ति जैसे अवैज्ञानिक धारणाओ पर विश्वास करके हम स्वयम अपना नुकसान कर रहे हैं। हमे सच्चा और प्रमाणिक इतिहास सामने लाना होगा।
इस पेज के माध्यम से हम राजपूतो के अतिरिक्त मराठा,राजू,जैसे दुसरे क्षत्रिय समाजो को भी एक प्लेटफोर्म पर लाने का प्रयास करेंगे
आज अधिकतर युवा इंटरनेट पर विकिपीडिया में अपना इतिहास खोजते हैं। पर कल तक जो जातियां खुद को राजपूतो से निकला हुआ बताकर गर्व करती थी आज सम्पन्न होने पर ये लोग हमारे गौरवशाली इतिहास को अपना बता रही हैं।
तथ्यहीन इतिहासकारों की किताबो का reference देकर उन्होंने विकिपीडिया पर एडिट करके अर्थ का अनर्थ कर दिया।
मतलब पहले भैंस चुराते थे,फिर हमारी जमीने छीन ली और अब हमारा इतिहास चुरा रहे हैं।
पर ये भूल रहे ह कि भेड अगर शेर की खाल पहन ले तो शेर जैसा जिगर कहाँ से लाएगी?
इन सब नवसामंतवादियों को जवाब देंने के लिए और क्षत्रिय राजपूत समाज का सच्चा इतिहास सामने लाने के लिए आप सब का सहयोग अवश्यम्भावी है।
इसलिए हम आप सभी मित्रो से अनुरोध करते है कि इस इतिहास को जानने के लिए हमारे पेज को भी ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचाने का कष्ट करे--
जय महाराणा 
जय क्षात्र धर्म।।क्षत्रिय समुदाय सदैव राष्ट्र धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देता आया है।
राजा के रूप में पालनहार,यौद्धा के रूप में धर्म और मात्रभूमि के रक्षक की भूमिका सदियों से निभाता आया है।
जिस इस्लाम की जोशीली धारा ने ईरान,मिस्र,मध्य एशिया,और यूरोप तक महज कुछ ही दशको में अपना झंडा फहरा दिया,उसे भारत के वीर क्षत्रियो ने आर्याव्रत में विफल कर दिया।

ये राजपूतो के सफल प्रतिरोध का ही परिणाम है कि भारत में वैदिक सनातन धर्म आज भी बहुसंख्यक है।
पर इतने बलिदानों के बाद भी राजपूतो के बारे में बहुत से लोगो को गलत धारणाएँ है।हमे हर स्तर पर दबाने और कमजोर करने की कोशिशे होती हैं। पहले जमीदारी उन्मूलन,फिर भूमि हदबंदी कानून,फिर आरक्षण से हमे लगातार आर्थिक,सामाजिक,राजनितिक रूप में नीचे धकेला गया। हमने सह लिया।
पर अब हमसे हमारा इतिहास भी छीना जा रहा है!!!!!!
गत एक सदी से जिस तरह से हमारे इतिहास के साथ छेड़छाड़ हो रही है वो सभी राजपूतों से अनभिज्ञ नही है और जिस तरह से कुछ इतिहासकारो ने और अंग्रेजो ने भी हमारे इतिहास को बहुत तोड मरोड कर पेश किया है इन इतिहासकारो ने सिर्फ वो ही इतिहास हमे बताया जिसमे राजपूत कमजोर रहे पर हमारे इस पेज को बनाने का मुख्य उद्देश्य अपने शुद्ध इतिहास को लोगो तक पहुंचाना है और अपने वीर योद्धाओ की वीर गाथाओ को लोगो के समक्ष रखना है जिसको पढने मात्र से ही शरीर मे जोश और अपने राजपूत होने पर गर्व होता है और हम ये सारा इतिहास पुख्ता सबूत और प्रमाणो के साथ ही पेश करेगें क्योकी बहुत से हमारे राजपूत भाई टीवी सीरीयल देखकर या फिर अफवाहो को सुनकर उसी को सच मानकर अपना इतिहास सोच बैठते है जो कि बहुत गलत है
विडम्बना देखिये कि जिन शक हूणो से हमारे पुरखो ने लड़ाई लडी और उन्हें मार भगाया।कुछ इतिहासकारों ने बिना किसी तथ्य के हमे उन्ही मलेच्छो का वंशज बता दिया।
इन तथाकथित इतिहासकारों ने लिखा है कि राजपूतो का इतिहास सातवी सदी से प्रारम्भ होता है जबकि उससे पहले महात्मा बुध, चन्द्रगुप्त मौर्य ,सिकन्दर को हराने वाले वीर पुरु,यौधेय वंश ,विक्रमादित्य ये सभी क्षत्रिय राजपुत्र थे और इनके वंशज आज भी क्षत्रिय राजपूत समाज का हिस्सा हैं।
हम ये सप्रमाण सिद्ध करेंगे ।
बहुत से वंश पहले शक्तिशाली थे पर बाद में कमजोर होकर कुछ अवनत हो गये कुछ दूर दराज के इलाको में चले गये कुछ दूसरी जातियों में मिल गये और कई इस्लाम धर्म में पूरी तरह धर्मान्तरित हो गये। कई वंश सिकुड़ते हुए आज एक दो ग
गाँव या परिवारों तक सीमित हो गये हैं।आज ज्यादातर राजपूत ही अपने इन प्राचीन गौरवशाली वंशो जैसे मोरी वंश,गौतम वंश,पुरु वंश,यौधेय(जोहिया)वंश के बारे में नही जानते।
इस पेज के माध्यम से हम उन सभी लुप्तप्राय वंशो का प्रमाणिक इतिहास भी सामने लाने का प्रयास करेंगे।
आज राजपूत समाज को खुद ही अपने वंशो की उत्पत्ति की सही जानकारी नही है। सुनी सुनाई बातो,अग्नि कुंड से उत्पत्ति जैसे अवैज्ञानिक धारणाओ पर विश्वास करके हम स्वयम अपना नुकसान कर रहे हैं। हमे सच्चा और प्रमाणिक इतिहास सामने लाना होगा।
इस पेज के माध्यम से हम राजपूतो के अतिरिक्त मराठा,राजू,जैसे दुसरे क्षत्रिय समाजो को भी एक प्लेटफोर्म पर लाने का प्रयास करेंगे
आज अधिकतर युवा इंटरनेट पर विकिपीडिया में अपना इतिहास खोजते हैं। पर कल तक जो जातियां खुद को राजपूतो से निकला हुआ बताकर गर्व करती थी आज सम्पन्न होने पर ये लोग हमारे गौरवशाली इतिहास को अपना बता रही हैं।
तथ्यहीन इतिहासकारों की किताबो का reference देकर उन्होंने विकिपीडिया पर एडिट करके अर्थ का अनर्थ कर दिया।
मतलब पहले भैंस चुराते थे,फिर हमारी जमीने छीन ली और अब हमारा इतिहास चुरा रहे हैं।
पर ये भूल रहे ह कि भेड अगर शेर की खाल पहन ले तो शेर जैसा जिगर कहाँ से लाएगी?
इन सब नवसामंतवादियों को जवाब देंने के लिए और क्षत्रिय राजपूत समाज का सच्चा इतिहास सामने लाने के लिए आप सब का सहयोग अवश्यम्भावी है।
इसलिए हम आप सभी मित्रो से अनुरोध करते है कि इस इतिहास को जानने के लिए हमारे पेज को भी ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचाने का कष्ट करे--
जय महाराणा
जय क्षात्र धर्म।।