Saturday, December 20, 2014

OLDEST UNIVERSITY FOUND- NOT NALANDA OR TAKSHSHILA- तेल्हारा विश्वविद्यालय

Photo: प्राचीन तेल्हारा विश्वविद्यालय
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दुनिया की प्राचीन यूनिवर्सिटी अब तक नालंदा यूनिवर्सिटी को माना जाता है। लेकिन हाल ही में बिहार के नालंदा जिले में की गई खुदाई में तेल्हारा विश्वविद्यालय के अवशेष मिले हैं । विशेषज्ञों के मुताबिक, अवशेष के आधार पर कहा जा सकता है कि तेल्हारा विश्वविद्यालय नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय से भी प्राचीन है।

बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा मामले सचिव आनंद कुमार ने कहा कि खुदाई से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों के आधार पर इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि तेल्हारा विश्वविद्यालय नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय से भी पुराना है । किशोर ने कहा, "पुरातत्वविदों की एक टीम को नालंदा जिले में चार बौद्ध मठों के प्रमाण मिले हैं जो कि टेराकोटा से बने हैं और उन पर पाली भाषा में लिखा है-'श्री प्रथमशिवपुर महाविहारियाय बिक्षु संघ' यह विश्वविद्यालय के मूल नाम का संकेत देते हैं । आमतौर पर इसे तेल्हारा विश्वविद्यालय कहा जाता है ।'

किशोर ने कहा कि चीनी यात्री ह्वेन सांग ने सातवीं शताब्दी में तेल्हारा का दौरा किया था और उन्होंने अपने लेख में इसका जिक्र 'तेलेत्का' के रूप में किया है। पुरातत्वविदों ने उस ईंट की खोज की है जिसे इस प्राचीन विश्वविद्यालय के नींव के रूप में उपयोग किया गया था । उन्होंने कहा, "ईंट का परिमाप 42गुना, 32गुना, 6 सेंटीमीटर है, जिससे पहली शताब्दी के कुषाण काल के प्रभाव का खुलासा होता है. इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि चौथी शताब्दी के नालंदा और छठी शताब्दी के विक्रमशिला विश्वविद्यालय से तेल्हारा विश्वविद्यालय प्राचीन है ।'

उन्होंने कहा कि यहां 100 साक्ष्य मिले हैं. उल्लेखनीय है कि तेल्हारा में 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर खुदाई का कार्य प्रारंभ किया गया था ।

ज्ञानोदयप्राचीन तेल्हारा विश्वविद्यालय
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दुनिया की प्राचीन यूनिवर्सिटी अब तक नालंदा यूनिवर्सिटी को माना जाता है। लेकिन हाल ही में बिहार के नालंदा जिले में की गई खुदाई में तेल्हारा विश्वविद्यालय के अवशेष मिले हैं । विशेषज्ञों के मुताबिक, अवशेष के आधार पर कहा जा सकता है कि तेल्हारा विश्वविद्यालय नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय से भी प्राचीन है।

बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा मामले सचिव आनंद कुमार ने कहा कि खुदाई से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों के आधार पर इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि तेल्हारा विश्वविद्यालय नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय से भी पुराना है । किशोर ने कहा, "पुरातत्वविदों की एक टीम को नालंदा जिले में चार बौद्ध मठों के प्रमाण मिले हैं जो कि टेराकोटा से बने हैं और उन पर पाली भाषा में लिखा है-'श्री प्रथमशिवपुर महाविहारियाय बिक्षु संघ' यह विश्वविद्यालय के मूल नाम का संकेत देते हैं । आमतौर पर इसे तेल्हारा विश्वविद्यालय कहा जाता है ।'

किशोर ने कहा कि चीनी यात्री ह्वेन सांग ने सातवीं शताब्दी में तेल्हारा का दौरा किया था और उन्होंने अपने लेख में इसका जिक्र 'तेलेत्का' के रूप में किया है। पुरातत्वविदों ने उस ईंट की खोज की है जिसे इस प्राचीन विश्वविद्यालय के नींव के रूप में उपयोग किया गया था । उन्होंने कहा, "ईंट का परिमाप 42गुना, 32गुना, 6 सेंटीमीटर है, जिससे पहली शताब्दी के कुषाण काल के प्रभाव का खुलासा होता है. इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि चौथी शताब्दी के नालंदा और छठी शताब्दी के विक्रमशिला विश्वविद्यालय से तेल्हारा विश्वविद्यालय प्राचीन है ।'

उन्होंने कहा कि यहां 100 साक्ष्य मिले हैं. उल्लेखनीय है कि तेल्हारा में 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर खुदाई का कार्य प्रारंभ किया गया था ।