Thursday, December 4, 2014

HOW VIVEKANAND WAS SENT TO USA BY RAJPUT AJIT SINGH JI

Photo: बहुत कम लोगो को पता है की खेतड़ी ,झुन्जुनु के महाराज अजित सिंहजी ने “स्वामी विवेकानद जी “ को अपने खुद के खर्चे पर अमेरिका में हुयी धरम संसद के लिए शिकागो भेजा था ……जहा स्वामी विवेकानंदा ने भारत का मानं बढ़ाया और विश्व का सर्वोत्तम भाषण दिया 

1891 में स्वामी विवेकानंद का राजस्थान आना हुआ। उस दौरान राजपुताना ही ऐसा प्रदेश था, जहां उन्होंने व्यापक स्तर पर बौद्धिक चर्चाएं शुरू कीं। उस समय तत्कालीन राजा मंगल सिंह मूर्तिपूजा के विरोधी थे। स्वामी जी ने ही राजा को अध्यात्म की सही परिभाषा बताई। अलवर से स्वामी जयपुर गए और वहां से माउंट आबू। वहां उनकी मुलाकात मुंशी फैज अली से हुई। मुंशी स्वामी जी से मिलकर बेहद प्रभावित हुए। वे समझ गए थे कि स्वामी जी का व्यक्तित्व अद्भुत है। उस दौरान आबू पर्वत पर राजपूत राजाओं की कोठियां हुआ करती थीं।मुंशी उन्हें खेतड़ी के राजा अजित सिंह के पास ले गए। अजीत सिंह खुद धार्मिक इंसान थे। वे स्वामी जी से मिलकर खुश हुए। अजीत सिंह उन्हें अपने साथ खेतड़ी ले गए। इस बीच काफी वक्त स्वामी जी ने खेतड़ी में ही गुजारा। 1893 में अमेरिका के शिकागो में धर्म संसद होने वाली थी। स्वामी जी के अनुयायी चाहते थे कि वे इसमें जाएं और हिंदू धर्म व वेदांत के बारे में अपना पक्ष रखें। अजित सिंह ने स्वामी जी से अनुरोध किया कि आप अमेरिका खेतड़ी दरबार के गुरु के रूप में जाएंगे। स्वामी जी का नाम उस समय तक विविदिशानंद था। यह नाम उ’चारण में मुश्किल होने के कारण अजित सिंह ने ही उन्हें विवेकानंद नाम रखने का निवेदन किया, वहीं अजित सिंह ने स्वामी जी की अमेरिका यात्रा का बंदोबस्त भी करवाया। उस दौरान खेतड़ी दरबार की ओर से स्वामी जी की मां व भाई के लिए 100 रुपए की धनराशि भी कोलकाता भिजवाई जाती थी,जो स्वामी जी के देहावसान के बाद भी जारी रही।

Shekhawat Ajit Singh ji of khetri is known for providing financial support to Vivekananda, and encouraging him to speak at the Parliament of the World’s Religions at Chicago in 1893.
From 1891 Ajit Singh started sending monthly stipend of INR 100 to Vivekanada’s family in Kolkata. On 1 December 1898 Vivekananda wrote a letter to Ajit Singh from Belur in which he requested him to make the donation permanent so that even after Vivekananda’s death his mother (Bhuvaneswari Devi 1841—1911) gets the financial assistance on regular basis. The letter archive of Khetri reveals he had frequent communication with the family members of Vivekananda

for pic - http://www.rkmissionkhetri.org/news/?cat=6
बहुत कम लोगो को पता है की खेतड़ी ,झुन्जुनु के महाराज अजित सिंहजी ने “स्वामी विवेकानद जी “ को अपने खुद के खर्चे पर अमेरिका में हुयी धरम संसद के लिए शिकागो भेजा था ……जहा स्वामी विवेकानंदा ने भारत का मानं बढ़ाया और विश्व का सर्वोत्तम भाषण दिया 

1891 में स्वामी विवेकानंद का राजस्थान आना हुआ। उस दौरान राजपुताना ही ऐसा प्रदेश था, जहां उन्होंने व्यापक स्तर पर बौद्धिक चर्चाएं शुरू कीं। उस समय तत्कालीन राजा मंगल सिंह मूर्तिपूजा के विरोधी थे। स्वामी जी ने ही राजा को अध्यात्म की सही परिभाषा बताई। अलवर से स्वामी जयपुर गए और वहां से माउंट आबू। वहां उनकी मुलाकात मुंशी फैज अली से हुई। मुंशी स्वामी जी से मिलकर बेहद प्रभावित हुए। वे समझ गए थे कि स्वामी जी का व्यक्तित्व अद्भुत है। उस दौरान आबू पर्वत पर राजपूत राजाओं की कोठियां हुआ करती थीं।मुंशी उन्हें खेतड़ी के राजा अजित सिंह के पास ले गए। अजीत सिंह खुद धार्मिक इंसान थे। वे स्वामी जी से मिलकर खुश हुए। अजीत सिंह उन्हें अपने साथ खेतड़ी ले गए। इस बीच काफी वक्त स्वामी जी ने खेतड़ी में ही गुजारा। 1893 में अमेरिका के शिकागो में धर्म संसद होने वाली थी। स्वामी जी के अनुयायी चाहते थे कि वे इसमें जाएं और हिंदू धर्म व वेदांत के बारे में अपना पक्ष रखें। अजित सिंह ने स्वामी जी से अनुरोध किया कि आप अमेरिका खेतड़ी दरबार के गुरु के रूप में जाएंगे। स्वामी जी का नाम उस समय तक विविदिशानंद था। यह नाम उ’चारण में मुश्किल होने के कारण अजित सिंह ने ही उन्हें विवेकानंद नाम रखने का निवेदन किया, वहीं अजित सिंह ने स्वामी जी की अमेरिका यात्रा का बंदोबस्त भी करवाया। उस दौरान खेतड़ी दरबार की ओर से स्वामी जी की मां व भाई के लिए 100 रुपए की धनराशि भी कोलकाता भिजवाई जाती थी,जो स्वामी जी के देहावसान के बाद भी जारी रही।



Shekhawat Ajit Singh ji of khetri is known for providing financial support to Vivekananda, and encouraging him to speak at the Parliament of the World’s Religions at Chicago in 1893.
From 1891 Ajit Singh started sending monthly stipend of INR 100 to Vivekanada’s family in Kolkata. On 1 December 1898 Vivekananda wrote a letter to Ajit Singh from Belur in which he requested him to make the donation permanent so that even after Vivekananda’s death his mother (Bhuvaneswari Devi 1841—1911) gets the financial assistance on regular basis. The letter archive of Khetri reveals he had frequent communication with the family members of Vivekananda

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