Sunday, December 14, 2014

बाबर एक ""गे"" ( होमोसेक्सुअल अथवा समलैंगिक )था....???

क्या आप जानते हैं कि... बाबर एक ""गे"" ( होमोसेक्सुअल अथवा समलैंगिक )था....???हालाँकि यह बात सुनने में थोड़ी अजीब लगती है....
परन्तु यही सत्य है....
और.... यह बात सुनका तो आप चकरा ही जायेंगे कि..... बाबरी मस्जिद को बाबर के नाम पर नहीं बनाया गया ..... बल्कि, हो ना हो .... उसके
कैम्प बाजार वाले लौंडे .... "बाबरी"... के नाम पर बनाया गया होगा.... जिसका कि बाबर दीवाना था...! हालाँकि बाबर की शादी ... 17 साल की उम्र में
ही ( मार्च 1500 में ) आयशा नामक स्त्री सेहो गयी थी..... लेकिन, एक "गे" होने के कारण ....बाबर को अपनी पत्नी मेंजरा भी दिलचस्पी नहीं थी....!
बाबर खुद अपने बाबरनामा में लिखता है कि...."" मैं आयशा के पास 10 , 15 या 20 दिनों में एकबार जाता था.... और, आयशा के प्रति मेरा प्यार
इतना कम हो गया था कि.... मेरी माँ खानम मुझेइसके लिए डांटा करती थी..... और, 20 -40दिनों में एक बार उसके पास भेजती थी..!
इसी समय कैम्प बाजार में बाबरी नामक एकलड़का था... और, हमारे नामों में समरूपता थी..!मुझे अपनी पत्नी से नहीं बल्कि, उस लड़के से
मुहब्बत थी.... और मैं उस लड़के को चाहनेलगा था... यहाँ तक कि... उसके लिए पागलहो गया था....! "" ( तारीख-ए शानी 125 -26 )
अब आपको ऐसा लग सकता है कि..... बाबर ......उस बाबरी से अपने भाई अथवा पुत्र की तरहकरता होगा.... इसीलिए उसने लिखा है....
लेकिन..... आगे पढने पर..... आपका पूरा भ्रमउसी तरह ख़त्म हो जाएगा .... जिस तरह आजअयोध्या से बाबरी मस्जिद ख़त्म हो चूका है....!
बाबर आगे लिखता है कि.... इसके पहले तो मुझेकिसी से इतना प्यार था ही नहीं.... और,ना कभी ऐसा अवसर आया था जब, मैंने इतने प्रीत
भरे शब्द किसी से बोले या कहे हों....!उस बाबरी नामक लौंडे के प्यार में पागल होकरबाबर..... उसके बारे में फारसी में कुछतुकबन्दियाँ लिखता है...... जिसका हिंदी कुछ इसप्रकार है...

""मेरे सामान कोई भी प्रेमी जो इतना न दुखी था,
ना आसक्त , ना ही असम्मानित ....और, मेरी मौत
ना इतनी दयाहीन ना ही तुझ जैसा हेय""
बाबरी नामक लौंडे के प्यार में बाबर का ये हाल
था कि.....
वो कहता है.... एक बार मैं अपने नौकरों के साथ
एक पतली गली से जा रहा था.... उसी समय ""
बाबरी "" मेरे सामने आ गया..... और, उसे देख कर
मैं शरमा गया ...और, उससे ना तो मैं एक शब्द बोल
पाया ... ना ही, उससे आँखें ही मिला पाया....!
बड़ी हड़बड़ी और शर्मिंदगी के साथ मैं मुहम्मद के
गीत गुनगुनाते आगे बढ़ गया कि....
मैं अपने महबूब को देख कर शरमा जाता हूँ.... मेरे
साथी मुझे, और मैं तुझे देखता हूँ....!
भावारितेक और यौनाधिक्य के कारण... मैं उस
बाबरी की याद में नंगे सर, नंगे पैर... बाग़ , बगीचों ..
सडकों और महलों में ....... बिना किसी मित्र
या परिवार की और देखे ही घूमा करता हूँ...!
मैं उसकी याद और पागलपन में खुद
को अथवा लोगों को उचित सम्मान नहीं दे
पाता हूँ....ऐसा विक्षिप्त हो गया हूँ मैं....!
( तारीख-ए शानी 125 -26 )
इसी तरह..... बाबर नामक वो लौंडेबाज लुटेरा ....बाबरी नामक लौंडे के प्यार में पागल होकरढेरों अनप-शनाप लिखता जाता है....!
इसीलिए..... बाबरी नामक उस लौंडे के प्यार मेंपागल...... बाबर से ये आशा करना भी बेवकूफी हैकि..... उसने ........ अयोध्या में मंदिर तोड़कर
अपने नाम पर....... बाबरी मस्जिदबनवाया होगा......बल्कि.... इसकी जगह ...... निश्चय ही वो..... अपनेप्रेमी लौंडे "" बाबरी "" के नाम पर ही उस मस्जिदका नाम रखा होगा......!लेकिन.... हमेशा की.... तरह बाबरी नाम देखतेही ....... इतिहासकारों ने बिना सोचे समझे .....
उसे बाबर के नाम के साथ जोड़ दिया......जबकि, वो मस्जिद ""बाबर"" के नाम परनहीं.......... बल्कि, उसके ""गे साथी"" .......
बाबरी के नाम बनाया गया था........जिसका कि बाबर दीवाना था....!हद तो ये है कि..... मुस्लिम भी बिना जाने-समझे ........ एक समलैंगिक के नाम पर बनाये गएमस्जिद पर गर्व करते हैं..... और, उसके टूटने परशोक मनाते हैं..... !क्या कोई मुस्लिम यह बता सकता है कि..... एक
समलैंगिक के नाम पर अतिक्रमण करबनाया गया मस्जिद ........मुस्लिमों को इतना प्रिय क्यों है...??????कहीं ऐसा तो नहीं कि...... मुस्लिम ......
बाबरी मस्जिद के बहाने ...... बाबर और उससमलैंगिक बाबरी ........ के रिश्ते की याद में एकमस्जिद बनाकर .