Wednesday, October 29, 2014

INDIA TO SAVE 8000 CRORES IN AFFIDAVID IF PAPERS ARE SELF CERTIFIED

एफिडेविट बनाने में हर वर्ष खर्च होते हैं 8000 करोड़ रुपए -

यह देखते हुए कि हम भारतीय हर वर्ष करीब आठ हजार करोड़ रुपए शपथ-पत्र बनवाने पर खर्च कर देते हैं, केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों को सरकारी कामों के लिए दस्तावेजों के स्व-प्रमाणन (सेल्फ अटेस्टेशन) को बढ़ावा देने को कहा है।कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों से वर्तमान में आवश्यक शपथ-पत्रों और विभिन्न आवेदनों के साथ लगने वाले दस्तावेजों के राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित करने की विभिन्ना चरणों में समीक्षा करने को कहा है। साथ ही जहां संभव हो, दस्तावेजों के स्व-प्रमाणन करवाने की व्यवस्था करने और शपथ-पत्र समाप्त करने को कहा है।पैसे और समय की बर्बादीकुछ मंत्रालयों ने आवेदकों द्वारा अंक सूची, जन्म प्रमाण-पत्र का स्व-प्रमाणन शुरू भी कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत अंतिम चरण में ओरिजिनल दस्तावेज दिखाने की व्यवस्था की गई है। मंत्रालय का कहना है कि दस्तावेजों का स्व-प्रमाणन "सिटिजन फ्रेंडली" है। शपथ पत्र बनवाना गरीबों के लिए पैसे की और नागरिकों और सरकारी अधिकारियों के लिए समय की बर्बादी है।
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